Teacher Transfer 2026: अंतर जिला स्थानांतरण में स्कूल आवंटन प्रक्रिया तेज, 10 जनवरी तक होगी पूरी
राज्य के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अंतर जिला स्थानांतरण के तहत स्कूल आवंटन की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। शिक्षा विभाग द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार 1 जनवरी 2026 से कई जिलों में स्कूल आवंटन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। इससे पहले 31 दिसंबर 2025 तक नालंदा जिले को छोड़कर राज्य के लगभग सभी जिलों में स्थानांतरित शिक्षकों को प्रखंड आवंटित किया जा चुका था। अब यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण यानी स्कूल आवंटन में प्रवेश कर चुकी है, जिसे विभाग ने 10 जनवरी 2026 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
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| Teacher Transfer 2026 |
शिक्षा विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार कटिहार, सुपौल, किशनगंज सहित कई जिलों में प्रखंड आवंटन के तुरंत बाद स्कूल आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पूरी प्रक्रिया ई-शिक्षकोष पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित की जा रही है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और शिक्षकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। विभाग का दावा है कि डिजिटल माध्यम से आवंटन होने के कारण मानवीय हस्तक्षेप में कमी आई है और शिकायतों की संख्या भी घटने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि अंतर जिला स्थानांतरण को लेकर शिक्षकों में लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। पहले स्कूल आवंटन की समय-सीमा 23 दिसंबर से 31 दिसंबर तक निर्धारित की गई थी, लेकिन रिक्त पदों के मिलान, विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता और स्कूलों की आवश्यकताओं के आकलन में देरी के कारण यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। हालांकि 1 जनवरी से इसे दोबारा गति दी गई है।
ई-शिक्षकोष के आंकड़ों के अनुसार अंतर जिला स्थानांतरण के लिए कुल 41,689 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 27,171 शिक्षकों को जिला आवंटित किया गया, जबकि 22,928 शिक्षकों को विकल्प के माध्यम से प्रखंड चयन का अवसर मिला। अब इन्हीं शिक्षकों को उनके संबंधित प्रखंडों के भीतर स्कूल आवंटित किए जा रहे हैं।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल आवंटन में रिक्त पदों, विषय की आवश्यकता और छात्र संख्या को प्राथमिकता दी जा रही है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, वहां पहले आवंटन किया जा रहा है, ताकि शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हो। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी जिले में अनावश्यक देरी या तकनीकी समस्या सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी की होगी।
कुल मिलाकर, अंतर जिला स्थानांतरण की यह प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो 10 जनवरी तक अधिकांश शिक्षकों को उनके नए स्कूल मिल जाएंगे और वे अपने नए कार्यस्थल पर योगदान दे सकेंगे।
Report By - Brajesh Kumar Gaurav
