Cigarette Price Hike India: 1 फरवरी से सिगरेट, गुटखा और पान मसाला महंगे, सरकार ने बढ़ाया टैक्स
तंबाकू और पान मसाला उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने कर ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए सिगरेट, गुटखा, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने का फैसला किया है। यह नई व्यवस्था 1 फरवरी से लागू होगी, जिसके बाद इन उत्पादों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है। खासतौर पर लंबी और प्रीमियम सिगरेट पर टैक्स का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
वित्त मंत्रालय ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत अब सिगरेट की लंबाई और फिल्टर के आधार पर प्रति 1000 स्टिक पर 2050 रुपये से लेकर 8500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। यह शुल्क पहले से लागू 40 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त होगा, जिससे उपभोक्ताओं पर दोहरे कर का भार पड़ेगा।
संशोधित कर ढांचे में सिगरेट को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। 65 मिमी तक की नॉन-फिल्टर सिगरेट पर प्रति स्टिक लगभग 2.50 रुपये अतिरिक्त शुल्क लगेगा, जबकि इसी श्रेणी की फिल्टर सिगरेट पर करीब 2.10 रुपये प्रति स्टिक टैक्स बढ़ेगा। 65 से 70 मिमी लंबाई वाली सिगरेट पर प्रति स्टिक 3.60 से 4 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क तय किया गया है। वहीं 70 से 75 मिमी लंबाई वाली प्रीमियम सिगरेट पर सबसे अधिक, यानी करीब 5.40 रुपये प्रति स्टिक का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। इससे प्रीमियम सिगरेट के दाम सबसे ज्यादा बढ़ने की संभावना है।
सरकार ने पान मसाला और गुटखा कारोबार पर भी सख्ती बढ़ा दी है। वित्त मंत्रालय ने स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकरण अधिनियम को अधिसूचित करते हुए पान मसाला की उत्पादन क्षमता के आधार पर उपकर लगाने का फैसला किया है। पहले से लागू 40 प्रतिशत जीएसटी को मिलाकर अब पान मसाला पर कुल टैक्स भार करीब 88 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। इसका सीधा असर पान मसाला और गुटखा की कीमतों पर पड़ेगा, जो आम उपभोक्ताओं की पहुंच से और दूर हो सकते हैं।
बीड़ी उद्योग पर भी इस फैसले का असर पड़ेगा। हालांकि बीड़ी पर 18 प्रतिशत जीएसटी ही लागू रहेगा, लेकिन नई अधिसूचना के कारण कीमतों में कुछ बढ़ोतरी संभव है। अब तक तंबाकू उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर की व्यवस्था थी, जिसे नया कर ढांचा पूरी तरह से प्रतिस्थापित करेगा।
सरकार का कहना है कि यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। तंबाकू से होने वाली बीमारियों पर बढ़ते खर्च को देखते हुए टैक्स बढ़ाकर खपत को हतोत्साहित करना और राजस्व बढ़ाना इसका मुख्य उद्देश्य है। कुल मिलाकर, 1 फरवरी के बाद सिगरेट, गुटखा और पान मसाला सस्ते नहीं रहेंगे और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
Report By : Brajesh Kumar Gaurav
