मोहन भागवत का सामाजिक एकता पर जोर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने समाज में आपसी सौहार्द और एकता को मजबूत करने का आह्वान किया है। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के सोनपैरी गांव में आयोजित एक हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से जाति, आर्थिक स्थिति, भाषा और क्षेत्रीय पहचान से ऊपर उठकर सोचने की अपील की।
भागवत ने कहा कि भारत सभी नागरिकों का साझा देश है और इसी भावना को अपनाना ही सच्चा सामाजिक सद्भाव है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसकी पृष्ठभूमि के आधार पर आंकना समाज को कमजोर करता है।
मातृभाषा के उपयोग पर जोर
सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए भागवत ने मातृभाषा के अधिक प्रयोग पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि कम से कम घर के भीतर सभी को अपनी मातृभाषा में संवाद करना चाहिए।
साथ ही, यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य राज्य या क्षेत्र में रहता है, तो उसे वहां की भाषा सीखने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय महत्व की हैं और सबका समान सम्मान होना चाहिए।
एंजेल चकमा हत्याकांड के बीच बयान
भागवत की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के MBA छात्र एंजेल चकमा की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि नस्लीय गालियों का विरोध करने पर एंजेल पर चाकू से हमला किया गया, जिसमें उनके छोटे भाई माइकल के सामने उनकी मौत हो गई।
एंजेल चकमा त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के निवासी थे और MBA की पढ़ाई के लिए देहरादून गए थे। पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एंजेल को अंतिम सेमेस्टर के बाद प्लेसमेंट ऑफर मिलने की उम्मीद थी। उनका सपना था कि नौकरी लगने के बाद वे अपने पिता, जो BSF में तैनात हैं, को जल्द से जल्द रिटायरमेंट लेने के लिए प्रेरित करें।
परिवार ने मांगी कड़ी सजा
एंजेल चकमा के परिवार ने इस जघन्य हत्या में शामिल सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है। यह मामला एक बार फिर देश में सामाजिक सौहार्द, सहिष्णुता और आपसी सम्मान पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
Report By: Brajesh Kumar Gaurav
